Sunday, June 1, 2008

अर्थव्यवस्था मे जान फूंकी कृषि ने

सरकार ने २००७-०८ के संशोधित आंकड़े २९ मई को जारी कि , ख़बर सकारात्मक है तथा सरकार को सुकून देने वाली भी किंतु चिंता का बिषय यह है कि आड़े वक्त मे कृषि ने साथ दिया है , जबकि अन्य सभी सेक्टर मसलन विनिर्माण , परिवहन ,बिजली, संचार, गैस , व्यापार , होटल इत्यादी मे पिछले वर्ष कि तुलना मे गिरावट दर्ज कि गई है । कृषि एक ऐसा क्षेत्र रहा जहाँ अनुमान (२.६%) से अधिक वृद्धि (४.५%) रही । सरकार के यह जय किसान के नारे से हुआ या राम भरोसे (यद्यपि कि अभी तक ऐसा ही हुआ है ) अभी निश्चय पूर्ण नही कहा जा सकता जब तक कि चार - पाँच साल इसी तरह कि वृद्धि न देखी जाए । सरकार कि खुशफहमी अन्तिम तिमाही के आंकड़े उड़ाने के लिए पर्याप्त है , यथा - विनिर्माण कि वृद्धि ५.८% (जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि मे १२.८% थी ), बिजली एवं गैस आपूर्ति कि वृद्धि दर ७.८ से घट कर ६.३% रह गई ।
ऐ आंकड़े यह दर्शाते है कि सम्प्रंग सरकार पुनः इतिहास दोहराने कि कोशिश न करे , क्योंकि ठीक पाँच वर्ष पहले एन डी ऐ ने भी GDP का शोर मचाया था , लेकिन आम जनता ने उसे नकार दिया था, वह इन्हे भी नकार देगी क्योंकि वह आंकडों कि मक्कारी को कुछ नही समझती उसे समझ मे सिर्फ़ अपनी दाल रोटी ही आती है , यदि उसे यह महंगाई के वजह से मसक्कत से मिल रही है तो यह महंगाई सम्प्रंग सरकार को बड़ी महंगी पड़ेगी

1 comment:

बाल किशन said...

ये वृद्धि दर भी नाकाफी है.
इतना होने पर भी किसानों की हालत मे सुधार कंहा है?
कम से कम ८% होनी ही चाहिए.